कविता · Reading time: 1 minute

एकला चलो रे

बेशक बिल्कुल
अकेले तू
बाकिर तनको
ग़लत नाहीं!
मंज़िल तहार
दूर बाटे
अबहीन लउकी
झलक नाहीं!
दे-दे के
धुंआ आख़िर
सुलगला से
का होई!
ज़िंदगी नाहीं,
ऊ मौत हअ
जेइमें होखे
लपट नाहीं!!
#Geetkar
Shekhar Chandra Mitra
#OshoVision
#EklaChaloRe

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Lyricist, Journalist, Social Activist
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