गीत · Reading time: 1 minute

उठs भइल अब भोर

सुरुज के किरिनिया से भइले अँजोर
कोयल कुके चिरई चिहके चहूँओर
उठs भइल अब भोर
सुरुज के किरिनिया से भइले अँजोर

खटिया के छोड़ि सब उठले किसनवा
फुटली किरिनिया के भइले जनमवा
घाम भइल घनघोर,चुवे अँखिया से लोर
धरे मोजर टीकोर
सुरुज के किरिनिया से भइले अँजोर

मंदिर के घंटी टूनुन टून बाजे
भक्ति के पायलिया पाव में साजे
हाथ लिही अब जोरि,होखे मन में अँजोर
रस चुवे पोरे पोरे
सुरुज के किरिनिया से भइले अंजोर

रहेले गणेश फुस की मड़इया में
साथ देले खुबे सांच के लड़इया में
उठे मन में हिलोर ,करे सब लोग शोर
खिले चंदा चकोर
सुरुज के किरिनिया से भइले अंजोर

गणेश नाथ तिवारी “विनायक”

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