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आवत बा यूपी के चुनाव

बदल गईल नेता लोग के ठाँव ये मोरे भैया।
घुमिहें अब रोज गाँव – गाँव ये मोरे भैया।
आवत बा यूपी के चुनाव ये मोरे भैया।
घुमिहें अब रोज गाँव – गाँव ये मोरे भैया।
विकास के गंगा अब तेजी में बहैइहें ।
सब के रोज नया सपना देखैइहें।
पुरनके वादा के नाही बा नाव ये मोरे भैया।
आवत बा यूपी के चुनाव ये मोरे भैया।
घुमिहें अब रोज गाँव – गाँव ये मोरे भैया।
जाति धरम के अब बाण चलैहे।
जीते के बाद ई सबके छकैइहें।
जीते के बाद न दीहें भाव ये मोरे भैया।
आवत बा यूपी के चुनाव ये मोरे भैया।
घुमिहें अब रोज गाँव – गाँव ये मोरे भैया।
नास्तिक भी आस्तिक बन जइहें।
मंदिर -मंदिर घूम के अइहें।
ऐसे नेता से अपने के बचाव ये मोरे भैया।
आवत बा यूपी के चुनाव ये मोरे भैया।
घुमिहें अब रोज गाँव – गाँव ये मोरे भैया।
-सिद्धार्थ गोरखपुरी

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अपने वक्त को एक आईना दिखा जाऊँगा। आज लिख रहा हूँ कल मैं लिखा जाऊँगा।। -सिद्धार्थ गोरखपुरी
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