मुक्तक · Reading time: 1 minute

आर-पार

आदमी-आदमी के बीच में
खाड़ा भईल दीवार के!
आवअ मिलके ढाहल जाव
नफ़रत के यादगार के!!
गुलामी-आजादी के बीच में
रास्ता कवनो ना होला
समझौता से काम ना चली
ज़ंग बा आर-पार के!!
Shekhar Chandra Mitra
#BhagatSinghReturns
#जनवादीगीतकार

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Lyricist, Journalist, Social Activist
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