गीत · Reading time: 1 minute

अगुआ के दुआरी

सोचता विजया अब जाए के ससुरारी।
घूमत बा शादी खातिर अगुआ के दुआरी।
शदियों न भएल बाढ़ आ गईल दुआरी।
बाढ़ आ गईल बा त उ लेइ अब बुड़ारी।
सोचता विजया अब जाए के ससुरारी।
पैंट शर्ट लिहले बा उ ली – कूपर।
पहिन लागे लागी सुपर डूपर।
अबकी पारी सुन लिहे भोला भंडारी।
सोचता विजया अब जाए के ससुरारी।
फेयर हँसम से चमकवले बा सुरतिया।
रोज पूजे जात बा डीह बाबा के मुरतिया।
डीह बाबा सुनी लेइ विजया के पुकारी।
सोचता विजया अब जाए के ससुरारी।
दिन में त घूमत बा और घूमत बा रात में।
बड़ा धूम धड़ाका होइ विजय के बारात में।
शादी में विजया करी घोड़ा के सवारी।
सोचता विजया अब जाए के ससुरारी।
-सिद्धार्थ गोरखपुरी

1 Like · 185 Views
Like
Author
अपने वक्त को एक आईना दिखा जाऊँगा। आज लिख रहा हूँ कल मैं लिखा जाऊँगा।। -सिद्धार्थ गोरखपुरी
You may also like:
Loading...